लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअभीसे हृदयमें सन्देह (भय) हो रहा है? हे पुत्र! तू तो बाँसकी जड़में घमोई हुआ (तू मेरे वंशके अनुकूल या अनुरूप नहीं हुआ)। पिताकी अत्यन्त घोर और कठोर वाणी सुनकर प्रहस्त ये कड़े वचन कहता हुआ घरको चला गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 781 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।
सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 781, 781
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।
English explanation
“Doubt has arisen in your heart already! Son, you have become like a destructive insect at the root of bamboo.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबहीं | अभी ही | already |
| ते | से | from |
| उर | हृदय में | in the heart |
| संसय | संदेह | doubt |
| होई | होने लगा है | has arisen |
| बेनुमूल | बाँस की जड़ में | at the root of bamboo |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| भयहु | तू हो गया है | you have become |
| घमोई | बाँस को नष्ट करने वाला कीड़ा | a bamboo-destroying insect |
2 सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।
English explanation
Hearing his father’s exceedingly harsh and dreadful words, the son departed for his residence after speaking sternly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| पितु | पिता की | father’s |
| गिरा | वाणी | speech |
| परुष | कठोर | harsh |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| घोरा | भयानक | dreadful |
| चला | चला गया | departed |
| भवन | अपने निवास की ओर | for his residence |
| कहि | कहकर | having spoken |
| बचन | वचन | words |
| कठोरा | कड़े | stern |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 781
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 781, 781
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।