लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।
मूल पाठ
यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।
सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 781, 781
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभो! यदि आप मेरी यह सम्मति मानेंगे, तो जगत्में दोनों ही प्रकारसे आपका सुयश होगा। रावणने गुस्सेमें भरकर पुत्रसे कहा—अरे मूर्ख! तुझे ऐसी बुद्धि किसने सिखायी?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 781 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।
English explanation
AI draft: My lord, if you accept this advice of mine, you will gain good renown in the world either way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| मत | सलाह | advice |
| जौं | यदि | if |
| मानहु | आप मानें | you accept |
| प्रभु | हे स्वामी | O lord |
| मोरा | मेरी | my |
| उभय | दोनों | both |
| प्रकार | रीतियों से | ways |
| सुजसु | अच्छी कीर्ति | good renown |
| जग | संसार में | in the world |
| तोरा | आपकी | your |
2 सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।
English explanation
Ravana angrily said to his son, “You fool, who taught you to think this way?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र | son |
| सन | से | to |
| कह | कहा | said |
| दसकंठ | दस कंठों वाला रावण | Ravana, the ten-necked king |
| रिसाई | क्रोधित होकर | angrily |
| असि | ऐसी | such |
| मति | बुद्धि | thinking |
| सठ | हे मूर्ख | you fool |
| केहिं | किसने | who |
| तोहि | तुझे | you |
| सिखाई | सिखाई | taught |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 781
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 781, 781
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।