लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे हर्षित होकर श्रीरामजीके चरणोंमें सिर नवाते हैं और पर्वतोंके शिखर ले-लेकर सब वीर दौड़ते हैं। 'कोसलराज श्रीरघुवीरजीकी जय हो पुकारते हुए भालू और वानर गरजते और ललकारते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 810 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।
गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।
स्रोत अभिलेख 6.39 · पुस्तक पृ. 810, 811
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।
English explanation
Joyfully they bow their heads at Rama’s feet; all the warriors rush forward holding mountain peaks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषित | हर्षित होकर | joyfully |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिर | सिर | their heads |
| नावहिं | झुकाते हैं | bow |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| गिरि | पर्वत के | of mountains |
| सिखर | शिखर | peaks |
| बीर | वीर योद्धा | brave warriors |
| सब | सभी | all |
| धावहिं | दौड़ते हैं | rush forward |
2 गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।
English explanation
The bears and monkey chiefs roar and challenge the enemy: ‘Victory to Rama, hero of Raghu’s lineage and lord of Kosala!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गर्जहिं | गर्जते हैं | roar |
| तर्जहिं | ललकारते हैं; धमकाते हैं | challenge; threaten |
| भालु | भालू योद्धा | bear warriors |
| कपीसा | वानर-प्रमुख | monkey chiefs |
| जय | जय हो | victory to |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| कोसलाधीसा | कोसल के स्वामी राम | Rama, lord of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 810
- सहायक विषय
- अंगद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 810, 811
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।