लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलङ्काको अत्यन्त श्रेष्ठ (अजेय) किला जानते हुए भी वानर प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके प्रतापसे निडर होकर चले। चारों ओरसे घिरी हुई बादलोंकी घटाकी तरह लङ्काको चारों दिशाओंसे घेरकर वे मुँहसे ही डंके और भेरी बजाने लगे॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 811 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।
घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।
स्रोत अभिलेख 6.39 · पुस्तक पृ. 810, 811
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।
English explanation
Though they knew Lanka was exceedingly hard to breach, the monkeys advanced fearlessly through Lord Rama’s might.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानत | जानते हुए | knowing |
| परम | अत्यंत | supremely |
| दुर्ग | दुर्गम; जीतने में कठिन | hard to breach |
| अति | बहुत | exceedingly |
| लंका | लंका नगरी को | the city of Lanka |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| प्रताप | प्रताप से | through his might |
| कपि | वानर | the monkeys |
| चले | आगे बढ़े | advanced |
| असंका | निर्भय; शंकारहित | fearlessly; without apprehension |
2 घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।
English explanation
Massed densely, they surrounded Lanka on all four sides; with their mouths alone they imitate the sounds of kettledrums and war drums.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घटाटोप | घना जमाव; सघन समूह | a dense mass |
| करि | बनाकर | forming |
| चहुँ | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं से | from the directions |
| घेरी | घेर लिया | surrounded |
| मुखहिं | मुँह से ही | with their mouths alone |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
| बजावहीं | बजाने जैसी ध्वनि करते हैं | imitate the sound of playing |
| भेरी | युद्ध के बड़े ढोल | large war drums |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 811
- सहायक विषय
- अंगद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 810, 811
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।