लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहम देवता श्रेष्ठ अधिकारी होकर भी स्वार्थपरायण हो आपकी भक्तिको भुलाकर निरन्तर भवसागरके प्रवाह (जन्म-मृत्युके चक्र) में पड़े हैं। अब हे प्रभो! हम आपकी शरणमें आ गये हैं, हमारी रक्षा कीजिये॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 889 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।
भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।
स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 888, 889
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।
English explanation
We gods, though greatly privileged and qualified, remained absorbed in self-interest and forgot devotion to you, O Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हम | हम | we |
| देवता | देवता | gods |
| परम | अत्यंत | greatly |
| अधिकारी | अधिकार और योग्यता वाले | privileged and qualified |
| स्वारथ | अपने हित में | self-interest |
| रत | लगे हुए | absorbed in |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| भगति | आपकी भक्ति | devotion to you |
| बिसारी | भुला दी | forgot |
2 भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।
English explanation
We have continually remained caught in the current of worldly existence. Now protect us, O Lord; we have come to your refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार का | of worldly existence |
| प्रबाहँ | प्रवाह में | in the current |
| संतत | निरंतर | continually |
| हम | हम | we |
| परे | पड़े हुए हैं | have remained caught |
| अब | अब | now |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect us |
| सरन | आपकी शरण में | to your refuge |
| अनुसरे | आए हैं | have come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 889
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 888, 889
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।