लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।
मूल पाठ
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।
बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।
स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 850, 851
भावार्थ
मूल पाठ के बादशौर्य और धैर्य उस रथके पहिये हैं। सत्य और शील (सदाचार) उसकी मजबूत ध्वजा और पताका हैं। बल, विवेक, दम (इन्द्रियोंका वशमें होना) और परोपकार—ये चार उसके घोड़े हैं, जो क्षमा, दया और समतारूपी डोरीसे रथमें जोड़े हुए हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 851 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।
English explanation
Courage and patience are that chariot’s wheels; truth and virtuous conduct are its steadfast flag and banner.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौरज | शौर्य | courage |
| धीरज | धैर्य | patience; fortitude |
| तेहि | उसके | of that |
| रथ | रथ | chariot |
| चाका | पहिए | wheels |
| सत्य | सत्य | truth |
| सील | सदाचार | virtuous conduct |
| दृढ़ | अटल; मजबूत | steadfast; firm |
| ध्वजा | ध्वज | flag |
| पताका | पताका | banner |
2 बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।
English explanation
Strength, discernment, self-restraint, and others’ welfare are its horses, harnessed with the reins of forgiveness, compassion, and even-mindedness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बल | शक्ति | strength |
| बिबेक | उचित-अनुचित का विवेक | discernment |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| परहित | दूसरों का हित | others’ welfare |
| घोरे | घोड़े | horses |
| छमा | क्षमा | forgiveness |
| कृपा | करुणा | compassion |
| समता | समभाव | even-mindedness |
| रजु | रस्सियाँ; लगामें | cords; reins |
| जोरे | जोड़े हुए | harnessed; joined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 851
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 850, 851
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।