लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भाई! वह प्रेम अब कहाँ है? मेरे व्याकुलतापूर्ण वचन सुनकर उठते क्यों नहीं? यदि मैं जानता कि वनमें भाईका विछोह होगा तो मैं पिताका वचन [जिसका मानना मेरे लिये परम कर्तव्य था] उसे भी न मानता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 830 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
English explanation
Brother, where is that love now? Even hearing my distraught words, you do not rise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| अनुराग | प्रेम | love |
| कहाँ | कहाँ | where |
| अब | अब | now |
| भाई | हे भाई | O brother |
| उठहु | तुम उठते हो | you rise |
| न | नहीं | not |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| मम | मेरे | my |
| बच | वचन | words |
| बिकलाई | व्याकुलता-भरे | full of anguish |
2 जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।
English explanation
Had I known that the forest would bring separation from my brother, I would not have obeyed even that command of my father.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| जनतेउँ | मैं जानता | I had known |
| बन | वन में | in the forest |
| बंधु | भाई से | from my brother |
| बिछोहू | वियोग | separation |
| पिता | पिता का | my father’s |
| बचन | वचन | command |
| मनतेउँ | मैं मानता | I would have obeyed |
| नहिं | नहीं | not |
| ओहू | वह भी | even that |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 830
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
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