लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।
मूल पाठ
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।
मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और बोले—] हे भाई! तुम मुझे कभी दु:खी नहीं देख सकते थे। तुम्हारा स्वभाव सदासे ही कोमल था। मेरे हितके लिये तुमने माता-पिताको भी छोड़ दिया और वनमें जाड़ा, गरमी और हवा सब सहन किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 830 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।
English explanation
Brother, you could never bear to see me distressed; your nature has always been tender.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकहु | तुम सह सकते हो | you can bear |
| न | नहीं | not |
| दुखित | दुखी | distressed |
| देखि | देखकर | seeing |
| मोहि | मुझे | me |
| काऊ | कभी | ever |
| बंधु | हे भाई | O brother |
| सदा | सदा | always |
| तव | तुम्हारा | your |
| मृदुल | कोमल | tender |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
2 मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।
English explanation
For my sake you left your parents and endured the forest’s cold, heat, and wind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| हित | हित | welfare |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| तजेहु | तुमने छोड़ दिया | you left behind |
| पितु | पिता | father |
| माता | माता | mother |
| सहेहु | तुमने सहा | you endured |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| हिम | ठंड | cold |
| आतप | धूप की तपन | the sun’s heat |
| बाता | हवा | wind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 830
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।