लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपुत्र, धन, स्त्री, घर और परिवार—ये जगत्में बार-बार होते और जाते हैं, परन्तु जगत्में सहोदर भाई बार-बार नहीं मिलता। हृदयमें ऐसा विचारकर हे तात! जागो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 830 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।
अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।
English explanation
Sons, wealth, wife, home, and family are gained and lost repeatedly in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र | sons |
| बित | धन | wealth |
| नारि | पत्नी | wife |
| भवन | घर | home |
| परिवारा | परिवार | family |
| होहिं | मिलते हैं | are gained |
| जाहिं | चले जाते हैं | are lost |
| जग | संसार में | in the world |
| बारहिं | बार-बार | time after |
| बारा | बार | time |
2 अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।
English explanation
Dear brother, consider this in your heart and awaken: a brother born of the same mother cannot be found again in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचारकर | considering |
| जियँ | मन में | in your heart |
| जागहु | जागो | awaken |
| ताता | हे प्रिय | dear one |
| मिलइ | मिलता है | is found |
| न | नहीं | not |
| जगत | संसार में | in the world |
| सहोदर | एक ही माँ से जन्मा | born of the same mother |
| भ्राता | भाई | brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 830
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।