लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवही कोसलाधीश श्रीरघुनाथजी आपपर दया करने आये हैं। हे प्रियतम! यदि आप मेरी सीख मान लेंगे, तो आपका अत्यन्त पवित्र और सुन्दर यश तीनों लोकोंमें फैल जायगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 778 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।
जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।
स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 778, 779
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।
English explanation
That very Rama, king of Raghu’s line and lord of Kosala, has come to show you compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very one |
| कोसलधीस | कोसल देश के स्वामी | lord of Kosala |
| रघुराया | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| आयउ | आए हैं | has come |
| करन | करने | to show |
| तोहि | तुम | you |
| पर | पर | toward |
| दाया | दया | compassion |
2 जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।
English explanation
Beloved, if you heed my counsel, your noble fame will be exceedingly pure throughout the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पिय | हे प्रिय पति | beloved husband |
| मानहु | मानें | heed |
| मोर | मेरी | my |
| सिखावन | सीख | counsel |
| सुजसु | उत्तम कीर्ति | noble fame |
| होइ | होगी | will be |
| तिहुँ | तीनों | all three |
| पुर | लोकों में | in the worlds |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| पावन | पवित्र | pure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 778
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 778, 779
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।