लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।
मूल पाठ
सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।
देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।
स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 775, 776
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपालु श्रीरघुनाथजी सेतुबन्धके तटपर चढ़कर समुद्रका विस्तार देखने लगे। करुणाकन्द (करुणाके मूल) प्रभुके दर्शनके लिये सब जलचरोंके समूह प्रकट हो गये (जलके ऊपर निकल आये)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 775 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।
English explanation
Ascending near the bridge, compassionate Rama surveys the vast expanse of the ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेतुबंध | बँधा हुआ सेतु | the constructed bridge |
| ढिग | पास | near |
| चढ़ि | चढ़कर | having ascended |
| रघुराई | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| चितव | देखते हैं | surveys |
| कृपाल | दयालु | compassionate |
| सिंधु | समुद्र का | of the ocean |
| बहुताई | विशाल विस्तार | vast expanse |
2 देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।
English explanation
All the groups of aquatic creatures appeared to see the Lord, the source of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखन | देखने | to see |
| कहुँ | के लिए | for the purpose of |
| प्रभु | प्रभु राम को | the Lord Rama |
| करुना | करुणा का | of compassion |
| कंदा | मूल स्रोत | the source |
| प्रगट | प्रकट | visible |
| भए | हो गए | became |
| सब | सभी | all |
| जलचर | जल में रहने वाले जीवों के | of aquatic creatures |
| बृंदा | समूह | groups |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 775
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 775, 776
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।