लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।
मूल पाठ
बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।
चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।
स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 775, 776
भावार्थ
मूल पाठ के बादनल-नीलने सेतु बाँधकर उसे बहुत मजबूत बनाया। देखनेपर वह कृपानिधान श्रीरामजीके मनको [बहुत ही] अच्छा लगा। सेना चली, जिसका कुछ वर्णन नहीं हो सकता। योद्धा वानरोंके समुदाय गरज रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 775 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।
English explanation
AI draft: The bridge was built and made very strong. Seeing it, Rama, the treasure of compassion, was pleased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाँधि | बाँधकर | having built |
| सेतु | पुल | the bridge |
| अति | बहुत | very |
| सुदृढ़ | मजबूत | strong |
| बनावा | बनाया | made |
| देखि | देखकर | on seeing |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम | Rama, the treasure of compassion |
| के | के | of |
| मन | मन को | to the heart |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
2 चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।
English explanation
The army set out; the scene defies description. Bands of monkey warriors roar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चली | चल पड़ी | set out |
| सेन | सेना | the army |
| कछु | कुछ भी | anything |
| बरनि | वर्णन किया | be described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
| गर्जहिं | गर्जना करते हैं | roar |
| मर्कट | वानर | monkey |
| भट | योद्धा | warriors |
| समुदाई | समूह | bands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 775
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 775, 776
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