लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।
मूल पाठ
मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।
अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 775, 776
भावार्थ
मूल पाठ के बादबहुत तरहके मगर, नाक (घडिय़ाल), मच्छ और सर्प थे, जिनके सौ-सौ योजनके बहुत बड़े विशाल शरीर थे। कुछ ऐसे भी जन्तु थे जो उनको भी खा जायँ। किसी-किसीके डरसे तो वे भी डर रहे थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 775 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।
English explanation
There were makaras, crocodiles, many kinds of fish, and serpents, with immensely large bodies measuring a hundred yojanas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मकर | मकर नामक बड़े जलजीव | large aquatic creatures called makaras |
| नक्र | मगरमच्छ | crocodiles |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| झष | मछलियाँ | fish |
| ब्याला | सर्प | serpents |
| सत | सौ | a hundred |
| जोजन | योजन | yojanas, an ancient distance unit |
| तन | शरीर | bodies |
| परम | अत्यंत | immensely |
| बिसाला | विशाल | large |
2 अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।
English explanation
Some creatures even ate those enormous beings; they too were frightened of certain others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अइसेउ | ऐसे भी | even such |
| एक | कुछ जीव | some creatures |
| तिन्हहि | उन विशाल जीवों को | those enormous creatures |
| जे | जो | who |
| खाहीं | खा जाते हैं | eat |
| एकन्ह | कुछ अन्य जीवों | certain other creatures |
| कें | के | of |
| डर | डर से | from fear |
| तेपि | वे भी | they too |
| डेराहीं | डरते हैं | are frightened |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 775
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 775, 776
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।