लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।
मूल पाठ
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।
छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।
स्रोत अभिलेख 6.76 · पुस्तक पृ. 845, 847
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोसलपति श्रीरामजीके प्रतापका स्मरण करके लक्ष्मणजीने वीरोचित दर्प करके बाणका सन्धान किया। बाण छोड़ते ही उसकी छातीके बीचमें लगा। मरते समय उसने सब कपट त्याग दिया॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 847 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।
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2 छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 847
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 845, 847
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