लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।
मूल पाठ
सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।
जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।
स्रोत अभिलेख 6.27 · पुस्तक पृ. 797, 798
भावार्थ
मूल पाठ के बादअरे रावण! चतुराई (कपट) छोड़कर सुन। कृपाके समुद्र श्रीरघुनाथजीका तू भजन क्यों नहीं करता? अरे दुष्ट! यदि तू श्रीरामजीका वैरी हुआ तो तुझे ब्रह्मा और रुद्र भी नहीं बचा सकेंगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 797 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।
English explanation
AI draft: Listen, Ravana! Abandon your cleverness; why do you not worship Rama, lord of Raghu’s line and ocean of compassion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| रावन | हे रावण, लंका के राजा | O Ravana, king of Lanka |
| परिहरि | छोड़कर | having abandoned |
| चतुराई | चालाकी | cleverness |
| भजसि | तू भजता है | you worship |
| न | नहीं; यहाँ क्यों नहीं | not; here, why not |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर | ocean of compassion |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
2 जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।
English explanation
Wretch, if you become Rama’s enemy, even Brahma and Shiva cannot protect you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौ | यदि | if |
| खल | हे दुष्ट | O wretch |
| भएसि | तू हुआ | you become |
| राम | भगवान राम | Rama |
| कर | का | of |
| द्रोही | द्रोह करने वाला; शत्रु | one hostile to; enemy |
| ब्रह्म | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| रुद्र | शिव | Shiva |
| सक | सकते हैं | can |
| राखि | बचा | protect |
| न | नहीं | not |
| तोही | तुझे | you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 797
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 797, 798
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।