लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।
मूल पाठ
सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।
सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।
स्रोत अभिलेख 6.55 · पुस्तक पृ. 825, 825
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं—] हे गिरिजे! सुनो, [प्रलयकालमें] जिन (शेषनाग)-के क्रोधकी अग्नि चौदहों भुवनोंको तुरंत ही जला डालती है और देवता, मनुष्य तथा समस्त चराचर [जीव] जिनकी सेवा करते हैं, उनको संग्राममें कौन जीत सकता है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 825 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।
English explanation
AI draft: Listen, Girija! His fire of anger burns the fourteen worlds in an instant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| गिरिजा | हे पार्वती, पर्वतराज की पुत्री | O Parvati, daughter of the mountain king |
| क्रोधानल | क्रोध की आग | fire of anger |
| जासू | जिनकी; यहाँ राम की | whose; here, Rama's |
| जारइ | जला देती है | burns up |
| भुवन | लोकों को | worlds |
| चारिदस | चौदह | fourteen |
| आसू | तुरंत | instantly |
2 सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।
English explanation
Who can defeat him in battle, whom gods, humans, and all moving and unmoving beings serve?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सक | सकता है | can |
| संग्राम | युद्ध में | in battle |
| जीति | जीतकर; पराजित कर | defeat |
| को | कौन | who |
| ताही | उन्हें; राम को | him; Rama |
| सेवहिं | सेवा करते हैं | serve |
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| अग | अचल प्राणी और पदार्थ | unmoving beings and things |
| जग | चलने वाले प्राणी | moving beings |
| जाही | जिनकी | whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 825
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 825
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।