लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।
मूल पाठ
यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।
संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।
स्रोत अभिलेख 6.55 · पुस्तक पृ. 825, 825
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस लीलाको वही जान सकता है जिसपर श्रीरामजीकी कृपा हो। सन्ध्या होनेपर दोनों ओरकी सेनाएँ लौट पड़ीं; सेनापति अपनी-अपनी सेनाएँ सँभालने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 825 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।
English explanation
Only one who receives Rama's grace understands this wondrous play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| कौतूहल | अद्भुत लीला | wondrous play |
| जानइ | जानता है | understands |
| सोई | वही | that one alone |
| जा | जिस | whom |
| पर | पर | upon |
| कृपा | कृपा | grace |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कै | की | of |
| होई | होती है | is bestowed |
2 संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।
English explanation
Evening fell; both armies withdrew and began tending to their respective troops.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संध्या | साँझ | evening |
| भइ | हुई | fell; came |
| फिरि | लौट गईं | turned back |
| द्वौ | दोनों | both |
| बाहनी | सेनाएँ | armies |
| लगे | लगे; आरंभ किया | began |
| सँभारन | सँभालने | tending to; reorganizing |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अलग | respective |
| अनी | सैन्य दल | troops |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 825
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 825
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।