लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।
मूल पाठ
ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।
तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।
स्रोत अभिलेख 6.55 · पुस्तक पृ. 825, 825
भावार्थ
मूल पाठ के बादव्यापक, ब्रह्म, अजेय, सम्पूर्ण ब्रह्माण्डके ईश्वर और करुणाकी खान श्रीरामचन्द्रजीने पूछा— लक्ष्मण कहाँ हैं? तबतक हनुमान् उन्हें ले आये। छोटे भाईको [इस दशामें] देखकर प्रभुने बहुत ही दु:ख माना॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 825 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।
English explanation
Rama, the all-pervading Absolute, unconquerable lord of the worlds and embodiment of compassion, asks, ‘Where is Lakshmana?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापक | सर्वत्र व्याप्त | all-pervading |
| ब्रह्म | परम ब्रह्म | the supreme Absolute |
| अजित | अजेय | unconquerable |
| भुवनेस्वर | लोकों के स्वामी | lord of the worlds |
| लछिमन | राम के छोटे भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama's younger brother |
| कहाँ | कहाँ हैं | where is |
| बूझ | पूछते हैं | asks |
| करुनाकर | करुणा के भंडार; राम | embodiment of compassion; Rama |
2 तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।
English explanation
By then Hanuman had brought Lakshmana. Seeing his younger brother, Lord Rama felt great sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| लगि | तक | by; until |
| लै | लेकर; लक्ष्मण को लेकर | bringing; carrying Lakshmana |
| आयउ | आए | came |
| हनुमाना | राम के सेवक हनुमान | Hanuman, Rama's devoted servant |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण को | his younger brother Lakshmana |
| देखि | देखकर | seeing |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| अति | बहुत | great; very |
| दुख | दुःख | sorrow |
| माना | अनुभव किया | felt |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 825
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 825
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।