लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभुके वचन सुनकर रीछ-वानर हर्षित हो गये। आकाशसे देवताओंने बहुत-से फूल बरसाये। सीताजी [के असली स्वरूप] को पहले अग्रिमें रखा था। अब भीतरके साक्षी भगवान् उनको प्रकट करना चाहते हैं॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 886 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।
सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।
स्रोत अभिलेख 6.108 · पुस्तक पृ. 885, 886
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, the bears and monkeys rejoiced; the gods showered many flowers from the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| प्रभु | प्रभु राम के | the Lord, Rama |
| बचन | वचन | words |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| नभ | आकाश | sky |
| ते | से | from |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| सुमन | फूल | flowers |
| बहु | बहुत | many |
| बरषे | बरसाए | showered |
2 सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।
English explanation
Rama, the witness within, had earlier placed Sita in fire; now he wishes to reveal her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता को | Sita |
| प्रथम | पहले | earlier |
| अनल | अग्नि | fire |
| महुँ | में | in |
| राखी | रखा था | had placed |
| प्रगट | प्रकट | manifest; revealed |
| कीन्हि | करना | to make |
| चह | चाहते हैं | wishes |
| अंतर | अंतःकरण के | of the inner being |
| साखी | साक्षी; अंतर्यामी राम | witness; Rama who witnesses within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 886
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 885, 886
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।