लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।
मूल पाठ
सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।
लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
स्रोत अभिलेख 6.2 · पुस्तक पृ. 773, 774
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके वचन सुनकर वानरराज सुग्रीवने बहुत-से दूत भेजे, जो सब श्रेष्ठ मुनियोंको बुलाकर ले आये। शिवलिङ्गकी स्थापना करके विधिपूर्वक उसका पूजन किया। [फिर भगवान् बोले—] शिवजीके समान मुझको दूसरा कोई प्रिय नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 774 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।
English explanation
Hearing this, Sugriva, king of the monkeys, sent many messengers; they summoned and brought all the eminent sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कपीस | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, king of the monkeys |
| बहु | बहुत से | many |
| दूत | दूत | messengers |
| पठाए | भेजे | sent |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनियों को | the eminent sages |
| सकल | सभी | all |
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| लै | लेकर | bringing along |
| आए | आए | came |
2 लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
English explanation
After installing the Shiva linga and worshipping according to prescribed rites, Rama said: No one else is as dear to me as Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लिंग | शिवलिंग | the Shiva linga |
| थापि | स्थापित करके | having installed |
| बिधिवत | विधि के अनुसार | according to prescribed rites |
| करि | करके | having performed |
| पूजा | पूजा | worship |
| सिव | शिव | Shiva |
| समान | के समान | as much as |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोहि | मुझे | to me |
| न | नहीं | not |
| दूजा | कोई दूसरा | anyone else |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 774
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 773, 774
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।