लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।
मूल पाठ
परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।
करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।
स्रोत अभिलेख 6.2 · पुस्तक पृ. 773, 774
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह (यहाँकी) भूमि परम रमणीय और उत्तम है। इसकी असीम महिमा वर्णन नहीं की जा सकती। मैं यहाँ शिवजीकी स्थापना करूँगा। मेरे हृदयमें यह महान् संकल्प है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 773 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।
English explanation
This land is exceedingly delightful and excellent. Its glory is boundless and cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| रम्य | रमणीय | delightful |
| उत्तम | श्रेष्ठ | excellent |
| यह | यह | this |
| धरनी | भूमि | land |
| महिमा | महिमा | glory |
| अमित | असीम | boundless |
| जाइ | की जा सकती | can be |
| नहिं | नहीं | not |
| बरनी | वर्णित | described |
2 करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।
English explanation
I shall establish Shiva here; this is a deep desire in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करिहउँ | मैं करूँगा | I shall perform |
| इहाँ | यहाँ | here |
| संभु | शिव | Shiva |
| थापना | स्थापना | installation |
| मोरे | मेरे | my |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| परम | प्रबल | deep |
| कलपना | अभिलाषा | desire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 773
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 773, 774
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।