लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणके ये वचन सुनकर अंगद क्रोधसहित वचन बोले—अरे नीच अभिमानी! सँभालकर (सोच-समझकर) बोल। जिनका फरसा सहस्रबाहुकी भुजाओंरूपी अपार वनको जलानेके लिये अग्रिके समान था,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 797 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।
सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।
स्रोत अभिलेख 6.26 · पुस्तक पृ. 797, 797
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।
English explanation
This is an AI-generated interpretive draft. Hearing this, Angada said angrily: You vile, arrogant fellow, speak with care!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अंगद | वालि के पुत्र अंगद | Angada, Vali’s son |
| सकोप | क्रोध सहित | angrily |
| कह | कहते हैं | says |
| बानी | वचन | words |
| बोलु | बोलो | speak |
| सँभारि | सँभलकर; विचारकर | carefully; mindfully |
| अधम | हे नीच | you vile fellow |
| अभिमानी | हे घमंडी | you arrogant fellow |
2 सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।
English explanation
Parashurama’s axe was like fire burning the vast, dense forest of Sahasrabahu’s arms—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहसबाहु | हजार भुजाओं वाले राजा सहस्रबाहु | Sahasrabahu, the thousand-armed king |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| गहन | घना वन | dense forest |
| अपारा | असीम; विशाल | boundless; vast |
| दहन | जलाने वाली | burning; consuming |
| अनल | अग्नि | fire |
| सम | के समान | like |
| जासु | जिनका | whose |
| कुठारा | फरसा | axe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 797
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 797, 797
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।