लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिनके फरसारूपी समुद्रकी तीव्र धारामें अनगिनत राजा अनेकों बार डूब गये, उन परशुरामजीका गर्व जिन्हें देखते ही भाग गया, अरे अभागे दशशीश! वे मनुष्य क्योंकर हैं?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 797 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।
तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।
स्रोत अभिलेख 6.26 · पुस्तक पृ. 797, 797
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।
English explanation
His axe was like an ocean with a fierce, cutting current, in which countless kings repeatedly sank—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका | whose |
| परसु | फरसा | battle-axe |
| सागर | समुद्र | ocean |
| खर | तीखी; प्रखर | sharp; fierce |
| धारा | धार; प्रवाह | blade-edge; current |
| बूड़े | डूब गए | sank |
| नृप | राजा | kings |
| अगनित | अनगिनत | countless |
| बहु | बहुत | many |
| बारा | बार | times |
2 तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।
English explanation
How can Rama, at whose very sight Parashurama’s pride vanished, be an ordinary man, you unfortunate ten-headed Ravana?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उनका | his |
| गर्ब | गर्व | pride |
| जेहि | जिन्हें | whom |
| देखत | देखते ही | upon seeing |
| भागा | भाग गया; मिट गया | fled; vanished |
| सो | वे | he |
| नर | साधारण मनुष्य | an ordinary man |
| क्यों | कैसे | how |
| दससीस | हे दस सिर वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| अभागा | हे अभागे | you unfortunate one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 797
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 797, 797
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