लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।
मूल पाठ
सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।
तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।
स्रोत अभिलेख 6.22 · पुस्तक पृ. 792, 792
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिव, ब्रह्मा [आदि] देवता और मुनियोंके समुदाय जिनके चरणोंकी सेवा [करना] चाहते हैं, उनका दूत होकर मैंने कुलको डुबा दिया? अरे ऐसी बुद्धि होनेपर भी तुम्हारा हृदय फट नहीं जाता?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 792 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।
English explanation
AI-draft interpretation: Shiva, Brahma, and the hosts of gods and sages desire to serve his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | शिव | Shiva, the deity |
| बिरंचि | ब्रह्मा | Brahma, the creator deity |
| सुर | देवता | gods |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| समुदाई | समुदाय; समूह | hosts; assemblies |
| चाहत | चाहते हैं | desire |
| जासु | जिनके; यहाँ राम के | whose; here, Rama's |
| चरन | चरणों की | of the feet |
| सेवकाई | सेवा | service |
2 तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।
English explanation
By becoming his messenger, I have supposedly ruined my lineage—does even this thought not occur to you?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उन्हीं के; राम के | his; Rama's |
| दूत | दूत | messenger |
| होइ | होकर | having become |
| हम | मैंने | I |
| कुल | वंश; कुल | lineage; clan |
| बोरा | डुबो दिया; नष्ट किया | ruined; brought to disgrace |
| अइसिहुँ | ऐसी भी | even such |
| मति | बुद्धि; विचार | thought; understanding |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बिहर | आती; विचरती | occurs; moves within |
| न | नहीं | not |
| तोरा | तुम्हारे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 792
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 792, 792
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।