लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।
मूल पाठ
सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।
खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।
स्रोत अभिलेख 6.5 · पुस्तक पृ. 776, 777
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुने समुद्रके पार डेरा डाला और सब वानरोंको आज्ञा दी कि तुम जाकर सुन्दर फल-मूल खाओ। यह सुनते ही रीछ-वानर जहाँ-तहाँ दौड़ पड़े॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 776 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।
English explanation
The Lord made camp across the ocean and gave instructions to all the monkeys.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| पार | के उस पार | on the far side of |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| डेरा | पड़ाव; शिविर | camp |
| कीन्हा | बनाया; डाला | established |
| सकल | सभी | all |
| कपिन्ह | वानरों | the monkeys |
| कहुँ | को | to |
| आयसु | आज्ञा | instruction; command |
| दीन्हा | दी | gave |
2 खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।
English explanation
‘Go and eat pleasant fruits and roots.’ Hearing this, the bears and monkeys rushed here and there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खाहु | खाओ | eat |
| जाइ | जाकर | having gone; go and |
| फल | फल | fruits |
| मूल | कंद-मूल | edible roots and tubers |
| सुहाए | अच्छे; मनभावन | pleasant; appealing |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| जहँ | जहाँ; इधर | here; wherever |
| तहँ | वहाँ; उधर | there |
| धाए | दौड़ पड़े | rushed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 776
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका सेनासहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वतपर निवास, रावणकी व्याकुलता
- मुद्रित पृष्ठ
- 776, 777
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।