लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकृपालु रघुनाथजी [तथा लक्ष्मणजी] दोनों भाई ऐसा कौतुक देखकर हँसते हुए चले। श्रीरघुवीर सेनासहित समुद्रके पार हो गये। वानरों और उनके सेनापतियोंकी भीड़ कही नहीं जा सकती॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 776 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।
स्रोत अभिलेख 6.5 · पुस्तक पृ. 776, 777
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
English explanation
AI-draft interpretation: Seeing this spectacle, the two brothers smiled, and compassionate Rama proceeded.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| कौतुक | कौतुक; अनोखा दृश्य | spectacle; amusing sight |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers—Rama and Lakshmana |
| बिहँसि | हँसकर; मुसकराकर | smiling |
| चले | आगे चले | proceeded |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
2 सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।
English explanation
Rama descended with his army. The throng of monkeys and their troop leaders was beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेन | सेना | army |
| सहित | के साथ | together with |
| उतरे | उतर आए | descended |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of the Raghu lineage |
| कहि | कहा; वर्णित किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| कपि | वानर | monkeys |
| जूथप | दलपति | troop leaders |
| भीरा | भीड़; विशाल जमाव | throng; vast gathering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 776
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका सेनासहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वतपर निवास, रावणकी व्याकुलता
- मुद्रित पृष्ठ
- 776, 777
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।