लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।
मूल पाठ
सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।
लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।
स्रोत अभिलेख 6.103 · पुस्तक पृ. 879, 880
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक बाणने नाभिके अमृतकुण्डको सोख लिया। दूसरे तीस बाण कोप करके उसके सिरों और भुजाओंमें लगे। बाण सिरों और भुजाओंको लेकर चले। सिरों और भुजाओंसे रहित रुण्ड (धड़) पृथ्वीपर नाचने लगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 879 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।
English explanation
One arrow dried up the reservoir of nectar in Ravana’s navel; the others struck his arms and heads in wrath.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सायक | बाण | arrow |
| एक | एक | one |
| नाभि | नाभि का | of the navel |
| सर | अमृत का सरोवर | reservoir of nectar |
| सोषा | सुखा दिया | dried up |
| अपर | अन्य बाण | the other arrows |
| लगे | लगे; प्रहार किया | struck |
| भुज | भुजाओं पर | the arms |
| सिर | सिरों पर | the heads |
| करि | करके | having acted with |
| रोषा | क्रोध | wrath |
2 लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।
English explanation
The arrows carried away the heads and arms; the headless, armless trunk danced on the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लै | लेकर | taking along |
| सिर | सिरों को | the heads |
| बाहु | भुजाओं को | the arms |
| चले | चले गए | went away |
| नाराचा | तीक्ष्ण बाण | sharp arrows |
| सिर | सिरों से | of heads |
| भुज | भुजाओं से | of arms |
| हीन | रहित | devoid |
| रुंड | सिरविहीन धड़ | headless trunk |
| महि | पृथ्वी पर | on the earth |
| नाचा | नाचा | danced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 879
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 879, 880
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।