लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! वेद कहते हैं कि साम, दान, दण्ड और भेद—ये चारों राजाके हृदयमें बसते हैं। ये नीति-धर्मके चार सुन्दर चरण हैं। [किन्तु रावणमें धर्मका अभाव है] ऐसा जीमें जानकर ये नाथके पास आ गये हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 809 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।
नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।
स्रोत अभिलेख 6.38 · पुस्तक पृ. 809, 810
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।
English explanation
Lord, the Vedas say that conciliation, gifts, punishment, and division dwell in a king's heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साम | समझाकर मेल कराने की नीति | conciliation |
| दान | दान या लाभ देकर अनुकूल करने की नीति | winning over through gifts |
| अरु | और | and |
| दंड | दंड देने की नीति | punishment or coercion |
| बिभेदा | फूट डालने की नीति | creating division |
| नृप | राजा के | a king's |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बसहिं | बसते हैं | dwell |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| कह | कहते हैं | say |
| बेदा | वेद | the Vedas |
2 नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।
English explanation
These are the noble feet of statecraft and righteousness. Recognizing this in their hearts, they came to you, Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीति | राजनीति; उचित शासन-नीति | statecraft |
| धर्म | धर्म; न्यायपूर्ण आचरण | righteousness |
| के | के | of |
| चरन | चरण; आधाररूपी पैर | feet; supporting foundations |
| सुहाए | सुंदर | noble; beautiful |
| अस | ऐसा | thus |
| जियँ | मन में | in their hearts |
| जानि | जानकर | recognizing |
| नाथ | हे स्वामी; आपके | Lord; you |
| पहिं | पास | to; near |
| आए | आ गए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 809
- सहायक विषय
- अंगद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 809, 810
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।