लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।
मूल पाठ
साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।
समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।
स्रोत अभिलेख 6.34 · पुस्तक पृ. 804, 805
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[अंगदने कहा—] अरे बीस भुजावाले! यदि तेरी दसों जीभें मैंने नहीं उखाड़ लीं तो सचमुच मैं लबार ही हूँ। श्रीरामचन्द्रजीके प्रतापको समझकर (स्मरण करके) अंगद क्रोधित हो उठे और उन्होंने रावणकी सभामें प्रण करके (दृढ़ताके साथ) पैर रोप दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 804 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।
English explanation
O twenty-armed one, I am indeed a braggart if I do not tear out your ten tongues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साँचेहुँ | सचमुच ही | indeed |
| मैं | मैं | I |
| लबार | डींगबाज | a braggart |
| भुज | भुजाओं वाला | armed |
| बीहा | बीस | twenty |
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| उपारिउँ | मैं उखाड़ दूँ | I tear out |
| तव | तुम्हारी | your |
| दस | दस | ten |
| जीहा | जीभें | tongues |
2 समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।
English explanation
Recalling Rama's might, Angada grew angry and, making a pledge, planted his foot in the middle of the assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | स्मरण करके | recalling |
| राम | राम का | Rama's |
| प्रताप | प्रताप | might |
| कपि | वानर अंगद | Angada, the monkey warrior |
| कोपा | क्रोधित हुए | grew angry |
| सभा | सभा के | of the assembly |
| माझ | बीच | in the middle |
| पन | प्रतिज्ञा | a pledge |
| करि | करके | making |
| पद | पैर | his foot |
| रोपा | जमा दिया | planted firmly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 804
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 804, 805
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।