लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।
मूल पाठ
जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।
बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।
स्रोत अभिलेख 6.34 · पुस्तक पृ. 804, 805
भावार्थ
मूल पाठ के बादअंगदकी युक्ति सुनकर रावण मुसकराया [और बोला—] अरे मूर्ख! बहुत झूठ बोलना तूने कहाँ सीखा? बालिने तो कभी ऐसा गाल नहीं मारा। जान पड़ता है तू तपस्वियोंसे मिलकर लबार हो गया है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 804 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।
English explanation
Hearing this argument, Ravana smiled: 'Fool, where did you learn so many lies?'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जुगति | युक्ति या तर्क | argument or reasoning |
| सुनत | सुनकर | hearing |
| रावन | राक्षसराज रावण | Ravana, the demon king |
| मुसुकाई | मुस्कराया | smiled |
| मूढ़ | हे मूर्ख | you fool |
| सिखिहि | तुमने सीखीं | you learned |
| कहँ | कहाँ | where |
| बहुत | इतनी अधिक | so much |
| झुठाई | झूठी बातें | lying talk |
2 बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।
English explanation
Bali never boasted like this; by associating with the ascetics, you have become a braggart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालि | अंगद के पिता बालि ने | Bali, Angada's father |
| न | नहीं | not |
| कबहुँ | कभी | ever |
| गाल | डींग | a boast |
| अस | ऐसी | such |
| मारा | मारी | made |
| मिलि | मिलकर | associating with |
| तपसिन्ह | तपस्वियों से | the ascetics |
| तैं | तू | you |
| भएसि | हो गया है | have become |
| लबारा | डींगबाज | a braggart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 804
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 804, 805
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।