लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।
मूल पाठ
गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।
मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।
स्रोत अभिलेख 6.34 · पुस्तक पृ. 804, 805
भावार्थ
मूल पाठ के बादतेरी लङ्का गूलरके फलके समान है। तुम सब कीड़े उसके भीतर [अज्ञानवश] निडर होकर बस रहे हो। मैं बंदर हूँ, मुझे इस फलको खाते क्या देर थी? पर उदार (कृपालु) श्रीरामचन्द्रजीने वैसी आज्ञा नहीं दी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 804 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।
English explanation
Your Lanka is like a cluster-fig fruit; you dwell inside it like insects, without apprehension.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गूलरि | गूलर का | of the cluster fig |
| फल | फल | fruit |
| समान | जैसी | like |
| तव | तुम्हारी | your |
| लंका | लंका | Lanka |
| बसहु | रहते हो | you dwell |
| मध्य | भीतर | inside |
| तुम्ह | तुम | you |
| जंतु | कीड़े | insects |
| असंका | बिना आशंका के | without apprehension |
2 मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।
English explanation
I am a monkey; eating a fruit takes me no time, but generous Rama has not given permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| बानर | वानर | a monkey |
| फल | फल | fruit |
| खात | खाने में | in eating |
| न | नहीं | not |
| बारा | देर | delay |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| दीन्ह | दी | gave |
| न | नहीं | not |
| राम | राम ने | Rama |
| उदारा | उदार | generous |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 804
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 804, 805
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।