लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह बाणोंके समूह छोडऩे लगा। मानो बहुत-से पंखवाले साँप दौड़े जा रहे हों। जहाँ-तहाँ वानर गिरते दिखायी पडऩे लगे। उस समय कोई भी उसके सामने न हो सके॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 821 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।
जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।
स्रोत अभिलेख 6.5 · पुस्तक पृ. 820, 821
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।
English explanation
He began releasing volleys of arrows, as though numerous winged serpents were rushing forth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर | बाणों के | of arrows |
| समुह | समूह | volleys |
| सो | वह, मेघनाद | he, Meghnada |
| छाड़ै | छोड़ने | to release |
| लागा | लगा | began |
| जनु | मानो | as though |
| सपच्छ | पंखों वाले | winged |
| धावहिं | दौड़ते हों | were rushing |
| बहु | बहुत-से | many |
| नागा | सर्प | serpents |
2 जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।
English explanation
Vanaras were seen falling everywhere; at that moment they could not stand against him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ | there |
| परत | गिरते हुए | falling |
| देखिअहिं | दिखाई पड़ते थे | were seen |
| बानर | वानर | vanaras |
| सन्मुख | सामने, मुकाबले में | in direct confrontation |
| होइ | हो | stand |
| न | नहीं | not |
| सके | सके | were able |
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | moment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 821
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 820, 821
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।