लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।
मूल पाठ
सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।
तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।
स्रोत अभिलेख 6.31 · पुस्तक पृ. 801, 801
भावार्थ
मूल पाठ के बादनित्यका रोगी, निरन्तर क्रोधयुक्त रहनेवाला, भगवान् विष्णुसे विमुख, वेद और संतोंका विरोधी, अपना ही शरीर पोषण करनेवाला, परायी निन्दा करनेवाला और पापकी खान (महान् पापी)—ये चौदह प्राणी जीते ही मुरदेके समान हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 801 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।
English explanation
One always afflicted by illness, one perpetually angry, one turned away from Vishnu, and one opposed to the Vedas and saints—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदैव | always |
| रोगबस | रोग से ग्रस्त | afflicted by illness |
| संतत | निरंतर | continually |
| क्रोधी | क्रोध करने वाला | angry person |
| बिष्नु | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| बिमूख | से विमुख | turned away from |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संत | संत | saints |
| बिरोधी | का विरोध करने वाला | opposed to |
2 तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।
English explanation
One concerned only with nourishing the body, a slanderer, and a repository of sin—these fourteen kinds of beings are like corpses even while alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनु | शरीर | the body |
| पोषक | केवल पोषण में लगा रहने वाला | one devoted only to nourishing |
| निंदक | निंदा करने वाला | slanderer |
| अघ | पापों की | of sin |
| खानी | खान; भंडार | mine; repository |
| जीवन | जीवित रहते हुए | while alive |
| सव | शव | corpse |
| सम | के समान | like |
| चौदह | चौदह | fourteen |
| प्रानी | प्राणी | beings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 801
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 801, 801
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।