लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।
मूल पाठ
सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।
जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।
स्रोत अभिलेख 6.68 · पुस्तक पृ. 837, 837
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर सत्यप्रतिज्ञ श्रीरामजीने एक लाख बाण छोड़े। वे ऐसे चले मानो पंखवाले काल-सर्प चले हों। जहाँ-तहाँ बहुत-से बाण चले, जिनसे भयंकर राक्षस योद्धा कटने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 837 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।
English explanation
Rama, true to his pledge, released arrows by the hundred thousand; they seemed like deadly serpents flying with wings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यसंध | सत्यप्रतिज्ञ श्रीराम ने | Rama, steadfast in his pledge |
| छाँड़े | छोड़े | released |
| सर | बाण | arrows |
| लच्छा | लाखों | by the hundred thousand |
| कालसर्प | प्राणघातक साँप | deadly serpents |
| जनु | मानो | as though |
| चले | चल पड़े | sped forth |
| सपच्छा | पंखों से युक्त | winged |
2 जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।
English explanation
Numerous iron arrows flew everywhere; fearsome demon warriors began to be cut down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ; हर ओर | there; everywhere |
| चले | चलने लगे | flew forth |
| बिपुल | बहुत-से | numerous |
| नाराचा | लोहे के नाराच बाण | iron arrows |
| लगे | लगे; शुरू हुए | began |
| कटन | कटने | to be cut down |
| भट | योद्धा | warriors |
| बिकट | भयंकर | fearsome |
| पिसाचा | राक्षस | demons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 837
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 837, 837
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।