लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।
मूल पाठ
कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।
घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.68 · पुस्तक पृ. 837, 837
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनके चरण, छाती, सिर और भुजदण्ड कट रहे हैं। बहुत-से वीरोंके सौ-सौ टुकड़े हो जाते हैं। घायल चक्कर खा-खाकर पृथ्वीपर पड़ रहे हैं। उत्तम योद्धा फिर सँभलकर उठते और लड़ते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 837 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।
English explanation
Feet, chests, heads, and mighty arms are being severed; many warriors are being cut into a hundred pieces.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कटहिं | कट रहे हैं | are being severed |
| चरन | पैर | feet |
| उर | छाती | chests |
| सिर | सिर | heads |
| भुजदंडा | दंड जैसी भुजाएँ | mighty, staff-like arms |
| बहुतक | बहुत-से | many |
| बीर | वीर योद्धा | valiant warriors |
| होहिं | हो रहे हैं | are becoming |
| सत | सौ | a hundred |
| खंडा | टुकड़े | pieces |
2 घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।
English explanation
The wounded reel and fall to the ground; brave warriors rise, steady themselves, and fight again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घुर्मि | चक्कर खाकर | reeling |
| घुर्मि | बार-बार घूमकर | reeling repeatedly |
| घायल | घायल योद्धा | wounded warriors |
| महि | धरती पर | to the ground |
| परहीं | गिरते हैं | fall |
| उठि | उठकर | having risen |
| संभारि | स्वयं को सँभालकर | having steadied themselves |
| सुभट | वीर योद्धा | brave warriors |
| पुनि | फिर | again |
| लरहीं | लड़ते हैं | fight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 837
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 837, 837
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।