लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबाण लगते ही वे मेघकी तरह गरजते हैं। बहुत-से तो कठिन बाणको देखकर ही भाग जाते हैं। बिना मुण्ड (सिर) के प्रचण्ड रुण्ड (धड़) दौड़ रहे हैं और 'पकड़ो, पकड़ो, मारो, मारो का शब्द करते हुए गा (चिल्ला) रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 837 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।
रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।
स्रोत अभिलेख 6.68 · पुस्तक पृ. 837, 837
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।
English explanation
When arrows strike them, the warriors roar like thunderclouds; many flee at the sight of the formidable arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागत | लगने पर | when struck by |
| बान | बाण | arrows |
| जलद | बादल | thunderclouds |
| जिमि | जैसे | like |
| गाजहीं | गरजते हैं | roar |
| बहुतक | बहुत-से योद्धा | many warriors |
| देखी | देखकर | on seeing |
| कठिन | कठोर; प्रचंड | formidable; hard |
| सर | बाण | arrows |
| भाजहिं | भाग जाते हैं | flee |
2 रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।
English explanation
Fierce headless trunks rush about, sounding the cries, ‘Seize them, seize them! Strike, strike!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रुंड | सिरकटे धड़ | headless trunks |
| प्रचंड | प्रचंड; उग्र | fierce |
| मुंड | सिर | heads |
| बिनु | बिना | without |
| धावहिं | दौड़ते हैं | rush about |
| धरु | पकड़ो! | Seize them! |
| धरु | पकड़ो! | Seize them! |
| मारू | मारो! | Strike! |
| मारु | मारो! | Strike! |
| धुनि | ध्वनि; पुकार | the cry |
| गावहिं | पुकारते हैं | chant; cry out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 837
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 837, 837
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।