लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।
मूल पाठ
सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।
राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।
स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 838, 839
भावार्थ
मूल पाठ के बादकरुणाभरे वचन सुनते ही भगवान् धनुष-बाण सुधारकर चले। महाबलशाली श्रीरामजीने सेनाको अपने पीछे कर लिया और वे [अकेले] क्रोधपूर्वक चले (आगे बढ़े)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 839 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।
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2 राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 839
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 839
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