लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।
मूल पाठ
खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।
लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।
स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 838, 839
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने धनुषको खींचकर सौ बाण सन्धान किये। बाण छूटे और उसके शरीरमें समा गये। बाणोंके लगते ही वह क्रोधमें भरकर दौड़ा। उसके दौडऩेसे पर्वत डगमगाने लगे और पृथ्वी हिलने लगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 839 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।
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2 लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 839
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 839
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