लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे दशमुख! संतजन ऐसी नीति कहते हैं कि चौथेपन (बुढ़ापे) में राजाको वनमें चला जाना चाहिये। हे स्वामी! वहाँ (वनमें) आप उनका भजन कीजिये जो सृष्टिके रचनेवाले, पालनेवाले और संहार करनेवाले हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 778 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।
तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।
स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 778, 779
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।
English explanation
O ten-headed Ravana, the wise teach this rule: in the fourth stage of life, a king should retire to the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतजन | the wise and holy |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| असि | ऐसी | such |
| नीति | आचरण की नीति | rule of conduct |
| दसानन | हे दस सिरों वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| चौथेंपन | जीवन के चौथे चरण में | in the fourth stage of life |
| जाइहि | जाना चाहिए | should go |
| नृप | राजा | a king |
| कानन | वन में | to the forest |
2 तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।
English explanation
My husband, worship there the Lord who creates, sustains, and dissolves creation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस प्रभु का | of that Lord |
| भजन | भक्ति और स्मरण | devotional worship |
| कीजिअ | कीजिए | please perform |
| तहँ | वहाँ, वन में | there, in the forest |
| भर्ता | हे पति | my husband |
| जो | जो | who |
| कर्ता | सृष्टि के रचयिता | the creator |
| पालक | पालन करने वाले | the sustainer |
| संहर्ता | संहार करने वाले | the dissolver of creation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 778
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 778, 779
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