लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।
मूल पाठ
नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।
चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।
स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 778, 779
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! श्रीरघुनाथजी तो दीनोंपर दया करनेवाले हैं। सम्मुख (शरण) जानेपर तो बाघ भी नहीं खाता। आपको जो कुछ करना चाहिये था, वह सब आप कर चुके। आपने देवता, राक्षस तथा चर-अचर सभीको जीत लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 778 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।
English explanation
AI draft: My lord, Rama, king of Raghu’s line, is compassionate toward the helpless. Even a tiger does not devour one who comes before it seeking refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| दीनदयाल | दीनों पर दया करने वाले | compassionate toward the helpless |
| रघुराई | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| बाघउ | बाघ भी | even a tiger |
| सनमुख | सामने; शरण में | before it, seeking refuge |
| गएँ | जाने पर | on approaching |
| न | नहीं | not |
| खाई | खाता है | devours |
2 चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।
English explanation
You have already done everything that was to be done. You have conquered the gods, the demons, and the whole world of moving and unmoving beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चाहिअ | चाहिए था | was required |
| करन | करना | to do |
| सो | वह | that |
| सब | सब कुछ | everything |
| करि | करके | having done |
| बीते | पूरा कर चुके हो | have finished |
| तुम्ह | तुमने | you |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| असुर | असुरों को | the demons |
| चराचर | चल और अचल समस्त जगत को | all moving and unmoving beings |
| जीते | जीत लिया | have conquered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 778
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 778, 779
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।