लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअरे स्त्रीके चोर! अरे कुमार्गपर चलनेवाले! अरे दुष्ट, पापकी राशि, मन्दबुद्धि और कामी! तू सन्निपातमें क्या दुर्वचन बक रहा है? अरे दुष्ट राक्षस! तू कालके वश हो गया है!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 803 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।
सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।
स्रोत अभिलेख 6.33 · पुस्तक पृ. 803, 804
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।
English explanation
You abductor of a woman, follower of an evil path, villain, heap of corruption, dull-witted and lustful one!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रे | अरे | you! |
| त्रिय | स्त्री का | of a woman |
| चोर | अपहरणकर्ता | abductor |
| कुमारग | बुरे मार्ग पर | on an evil path |
| गामी | चलने वाले | one who follows |
| खल | दुष्ट | villain |
| मल | पापों का | of corruption |
| रासि | ढेर | heap |
| मंदमति | मंदबुद्धि | dull-witted |
| कामी | कामासक्त | lustful |
2 सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।
English explanation
You babble wicked words like one delirious with fever; wicked man-eater, you have fallen under death’s sway.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सन्यपात | सन्निपात के उन्माद में | in feverish delirium |
| जल्पसि | तुम बकते हो | you babble |
| दुर्बादा | बुरी बातें | wicked utterances |
| भएसि | तुम हो गए हो | you have become |
| कालबस | काल के अधीन | subject to death |
| खल | हे दुष्ट | wicked one |
| मनुजादा | मनुष्यभक्षी | man-eater |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 803
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 803, 804
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।