लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।
मूल पाठ
रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।
कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।
स्रोत अभिलेख 6.21 · पुस्तक पृ. 791, 792
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[रावणने कहा—] अरे बंदरके बच्चे! सँभालकर बोल! मूर्ख! मुझ देवताओंके शत्रुको तूने जाना नहीं? अरे भाई! अपना और अपने बापका नाम तो बता। किस नातेसे मित्रता मानता है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 791 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।
English explanation
You monkey's brat, mind your words! Fool, you do not know me, the enemy of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रे | अरे! | Hey! |
| कपिपोत | वानर के बच्चे | monkey's brat |
| बोलु | बोल | speak |
| संभारी | सँभलकर | carefully |
| मूढ़ | मूर्ख | fool |
| न | नहीं | not |
| जानेहि | तू जानता है | you know |
| मोहि | मुझे | me |
| सुरारी | देवताओं के शत्रु को | the enemy of the gods |
2 कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।
English explanation
Tell me your name and your father's, fellow. On what relationship should our friendship be recognized?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | बताओ | tell |
| निज | अपना | your own |
| नाम | नाम | name |
| जनक | पिता | father |
| कर | का | of |
| भाई | भाई | fellow |
| केहि | किस | what |
| नातें | संबंध से | through a relationship |
| मानिऐ | मानी जाए | should be recognized |
| मिताई | मित्रता | friendship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 791
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 791, 792
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।