लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणको रथपर और श्रीरघुवीरको बिना रथके देखकर विभीषण अधीर हो गये। प्रेम अधिक होनेसे उनके मनमें सन्देह हो गया [कि वे बिना रथके रावणको कैसे जीत सकेंगे]। श्रीरामजीके चरणोंकी वन्दना करके वे स्नेहपूर्वक कहने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 850 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।
अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।
स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 850, 851
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।
English explanation
AI draft: Ravana rode a chariot, while Rama, the hero of Raghu’s lineage, had none. Seeing this, Vibhishana became anxious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावनु | रावण, लंका का राजा | Ravana, king of Lanka |
| रथी | रथ पर सवार | mounted on a chariot |
| बिरथ | बिना रथ के | without a chariot |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| देखि | देखकर | having seen |
| बिभीषन | विभीषण, रावण के भाई और राम के सहयोगी | Vibhishana, Ravana’s brother and Rama’s ally |
| भयउ | हो गए | became |
| अधीरा | व्याकुल | anxious |
2 अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।
English explanation
His deep love gave rise to apprehension. Bowing at Rama’s feet, he spoke affectionately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अधिक | बहुत अधिक | deep; great |
| प्रीति | प्रेम | love |
| मन | मन में | in his mind |
| भा | उत्पन्न हुआ | arose |
| संदेहा | संशय; आशंका | doubt; apprehension |
| बंदि | वंदना करके | having bowed in reverence |
| चरन | राम के चरणों की | at Rama’s feet |
| कह | कहा | said |
| सहित | के साथ | with |
| सनेहा | स्नेह | affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 850
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 850, 851
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।