लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके वचन सबके मनको अच्छे लगे। तदनन्तर वे श्रेष्ठ मुनि अपने-अपने आश्रमोंको लौट आये। [शिवजी कहते हैं—] हे पार्वती! श्रीरघुनाथजीकी यह रीति है कि वे शरणागतपर सदा प्रीति करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 774 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।
गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 774, 775
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।
English explanation
Rama’s words pleased everyone’s heart. The eminent sages returned to their respective hermitages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| बचन | वचन | words |
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| जिय | हृदय को | to the heart |
| भाए | अच्छे लगे | were pleasing |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने, प्रत्येक के अलग | respective |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitages |
| आए | लौट आए | returned |
2 गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।
English explanation
O Parvati, this is Rama’s way: he always loves those who seek refuge in him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिजा | हे पर्वतराज की पुत्री पार्वती | O Parvati, daughter of the mountain king |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कै | की | of |
| यह | यह | this |
| रीती | रीति, स्वभाव | way, nature |
| संतत | सदा | always |
| करहिं | करते हैं | shows |
| प्रनत | शरणागतों | those who seek refuge |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीती | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 774
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 774, 775
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।