लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।
मूल पाठ
बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।
बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।
स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 774, 775
भावार्थ
मूल पाठ के बादचतुर नल और नीलने सेतु बाँधा। श्रीरामजीकी कृपासे उनका यह [उज्ज्वल] यश सर्वत्र फैल गया। जो पत्थर आप डूबते हैं और दूसरोंको डुबा देते हैं, वे ही जहाजके समान [स्वयं तैरनेवाले और दूसरोंको पार ले जानेवाले] हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 775 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।
English explanation
The skilled Nila and Nala built the bridge; through Rama’s grace, their fame became manifest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाँधा | बनाया | built |
| सेतु | पुल | the bridge |
| नील | वानर नील ने | Nila, the vanara |
| नल | वानर नल ने | Nala, the vanara |
| नागर | कुशल, चतुर | skilled, adept |
| राम | राम की | Rama’s |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| जसु | यश | fame |
| भयउ | हुआ | became |
| उजागर | प्रकट, प्रसिद्ध | manifest, widely known |
2 बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।
English explanation
The very stones that sink and cause others to sink became like boats.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूड़हिं | डूबते हैं | sink |
| आनहि | दूसरों को | others |
| बोरहिं | डुबाते हैं | cause to sink |
| जेई | जो | which |
| भए | हो गए | became |
| उपल | पत्थर | stones |
| बोहित | नाव | boats |
| सम | के समान | like |
| तेई | वे ही | those very ones |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 775
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 774, 775
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