लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
मूल पाठ
महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 774, 775
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह न तो समुद्रकी महिमा वर्णन की गयी है, न पत्थरोंका गुण है और न वानरोंकी ही कोई करामात है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 775 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
English explanation
This is not a description of the ocean’s greatness; nor is it a property of the stones or an accomplishment of the vanaras.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महिमा | महिमा | greatness |
| यह | यह | this |
| न | नहीं | not |
| जलधि | समुद्र | the ocean |
| कइ | की | of |
| बरनी | वर्णित की गई | has been described |
| पाहन | पत्थरों का | of the stones |
| गुन | गुण, क्षमता | property, capacity |
| न | न ही | nor |
| कपिन्ह | वानरों | the vanaras |
| कइ | की | of |
| करनी | करामात, किया हुआ कार्य | accomplishment, deed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 775
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 774, 775
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