लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।
मूल पाठ
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।
चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।
स्रोत अभिलेख 6.42 · पुस्तक पृ. 813, 814
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके प्रतापसे प्रबल वानरोंके झुंड राक्षस योद्धाओंके समूह-के-समूह योद्धाओंको मसल रहे हैं। वानर फिर जहाँ-तहाँ किलेपर चढ़ गये और प्रतापमें सूर्यके समान श्रीरघुवीरकी जय बोलने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 813 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।
English explanation
AI draft interpretation: Empowered by Rama’s might, the monkey troops crush the companies of formidable demon warriors.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| प्रताप | प्रताप से | through his might |
| प्रबल | बलवान | powerful |
| कपिजूथा | वानरों के समूह | troops of monkeys |
| मर्दहिं | कुचलते हैं | crush |
| निसिचर | राक्षसों के | of demons |
| सुभट | श्रेष्ठ योद्धा | formidable warriors |
| बरूथा | समूहों को | the companies |
2 चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।
English explanation
Then the monkeys climbed the fortress at various places, acclaiming: Victory to Rama, the hero of Raghu’s line, a sun of splendor!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़े | चढ़ गए | climbed |
| दुर्ग | दुर्ग पर | onto the fortress |
| पुनि | फिर | then |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| बानर | वानर | the monkeys |
| जय | जय हो | victory to |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम की | Rama, hero of Raghu’s line |
| प्रताप | प्रताप के | of splendor |
| दिवाकर | सूर्य | the sun |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 813
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 813, 814
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।