लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराक्षसोंके झुंड वैसे ही भाग चले जैसे जोरकी हवा चलनेपर बादलोंके समूह तितर-बितर हो जाते हैं। लङ्का नगरीमें बड़ा भारी हाहाकार मच गया। बालक, स्त्रियाँ और रोगी [असमर्थताके कारण] रोने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 813 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।
हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।
स्रोत अभिलेख 6.42 · पुस्तक पृ. 813, 814
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।
English explanation
The demon hosts fled like masses of clouds driven before a powerful wind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | went off |
| निसाचर | राक्षसों के | of demons |
| निकर | समूह | hosts |
| पराई | भागकर | fleeing |
| प्रबल | प्रबल | powerful |
| पवन | हवा से | before the wind |
| जिमि | जैसे | as |
| घन | बादलों के | of clouds |
| समुदाई | समूह | masses |
2 हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।
English explanation
A great outcry arose in the city; children and distressed women wept.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हाहाकार | चीख-पुकार | outcry |
| भयउ | हुआ | arose |
| पुर | नगर में | in the city |
| भारी | बहुत भारी | great |
| रोवहिं | रोते हैं | weep |
| बालक | बच्चे | children |
| आतुर | व्याकुल | distressed |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 813
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 813, 814
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।