लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके चरणकमलोंको हृदयमें रखकर पवनपुत्र हनुमान्जी अपना बल बखानकर (अर्थात् मैं अभी लिये आता हूँ, ऐसा कहकर) चले। उधर एक गुप्तचरने रावणको इस रहस्यकी खबर दी। तब रावण कालनेमिके घर आया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 825 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।
उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।
स्रोत अभिलेख 6.56 · पुस्तक पृ. 825, 826
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Holding Rama’s lotus feet in his heart, Hanuman, son of the Wind, set out proclaiming his strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Rama |
| चरन | चरण | feet |
| सरसिज | कमल; कमल-समान | lotuses; lotus-like |
| उर | हृदय में | in the heart |
| राखी | रखकर | having placed |
| चला | चल पड़े | set out |
| प्रभंजन | पवनदेव के | of the Wind god |
| सुत | पुत्र हनुमान | son, Hanuman |
| बल | अपने बल का | his strength |
| भाषी | बखान करते हुए | proclaiming |
2 उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।
English explanation
Meanwhile, a messenger disclosed the situation, and Ravana came to Kalanemi’s house.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उहाँ | उधर | meanwhile, there |
| दूत | दूत ने | a messenger |
| एक | एक | one |
| मरमु | भीतरी बात; स्थिति का रहस्य | the crucial details of the situation |
| जनावा | बताया | made known |
| रावन | राक्षसराज रावण | Ravana, the demon king |
| कालनेमि | राक्षस कालनेमि के | of the demon Kalanemi |
| गृह | घर | house |
| आवा | आया | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 825
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 826
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।