लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणने उसको सारा मर्म (हाल) बतलाया। कालनेमिने सुना और बार-बार सिर पीटा (खेद प्रकट किया)। [उसने कहा—] तुम्हारे देखते-देखते जिसने नगर जला डाला, उसका मार्ग कौन रोक सकता है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 825 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।
देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।
स्रोत अभिलेख 6.56 · पुस्तक पृ. 825, 826
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।
English explanation
Ten-headed Ravana explained the situation, and Kalanemi heard it; Kalanemi repeatedly shook his head in dismay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसमुख | दस मुख वाला रावण | ten-headed Ravana |
| कहा | बताया | related |
| मरमु | स्थिति का रहस्य | the crucial details |
| तेहिं | उसने, अर्थात कालनेमि ने | he, namely Kalanemi |
| सुना | सुना | heard |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| कालनेमि | राक्षस कालनेमि ने | Kalanemi |
| सिरु | सिर | his head |
| धुना | धुना; खेद से हिलाया | shook in dismay |
2 देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।
English explanation
Who can block the path of the one who burned your city before your very eyes?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखते हुए | while watching |
| तुम्हहि | तुम्हारे ही | you yourself |
| नगरु | नगर, लंका | the city, Lanka |
| जेहिं | जिसने, अर्थात हनुमान ने | the one who, namely Hanuman |
| जारा | जला दिया | burned |
| तासु | उसका | his |
| पंथ | मार्ग | path |
| को | कौन | who |
| रोकन | रोकने में | to block |
| पारा | समर्थ हो सकता है | can be capable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 825
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 826
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।